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Discover the Secret to Achieving Happiness and Success Without Chasing Them

क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग क्यों इतने प्रयास के बाद भी वह नहीं पा पाते जो वे चाहते हैं, जबकि दूसरों को वह सब कुछ मिल जाता है बिना किसी प्रयास के? यह सब कुछ हमारी मानसिकता और हमारे दृष्टिकोण पर निर्भर करता है।

कई बार ऐसा होता है कि एक व्यक्ति किसी के सामने रोकर मनाता है, रिक्वेस्ट करता है कि बस 10 मिनट बात कर लो, लेकिन उसका पार्टनर उसकी बात नहीं सुनता। दूसरी ओर, एक व्यक्ति किसी को साफ-साफ कह देता है कि मुझे तुम्हारी कोई परवाह नहीं, फिर भी लोग उसे इम्प्रेस करने की कोशिश में लगे रहते हैं।

ऐसा क्यों होता है कि मंदिर के सीढ़ियों पर बैठने वाला भिखारी लोगों से मदद मांगता है कि दो पैसे देकर मेरी हेल्प करो, तो लोग उसकी हेल्प नहीं करते, लेकिन उसी मंदिर के पुजारी की झोली में वो लाखों रुपए का दान करके चले जाते हैं। दोस्तों ऐसा क्यों होता है की एक मजदूर पूरे दिन कड़ी मेहनत करता है और उसके बाद भी उसका जीवन है बड़ी मुश्किलों से गुजर रहा होता है और एक दूसरा इंसान ऐसा होता है। जो आरामदायक ऑफिस में AC वाली ऑफिस में बैठता है और उतनी खास मेहनत भी नहीं करता, लेकिन उनका जीवन बहुत ही ज्यादा आरामदायक होता है।

1. अपेक्षाओं का परित्याग: हमारे जीवन में जब हमें किसी चीज की अत्यधिक जरूरत होती है, तब वह हमें नहीं मिलती। चाहे वह प्यार हो, पैसा हो, या सम्मान। जब आप उन चीजों की जरूरत को छोड़ देंगे और उनके योग्य बन जाएंगे, तब वे चीजें खुद-ब-खुद आपकी ओर आकर्षित होंगी।

आप अपने आप को कैसे लायक बनाओगे?

बात करेंगे इस पोस्ट में, जब किसी नादान इंसान को कोई ये कहेगा कि मैं तुम्हें बहुत ज्यादा प्यार करता हूं और तुम्हारे बिना नहीं रह सकता। तब वो नादान इंसान बहुत ज्यादा खुश हो जाएगा वो कहेगा वाह भाई वाह मैं तो कितना ज्यादा लकी हूँ कि मुझे तुम जैसा इंसान मिला वो सातवें आसमान में उड़ने लगेगा।

लेकिन यही बात अगर कोई ऐसा इंसान को कहता है जिसने अपनी लाइफ के एक्सपीरियंस से अपने लाइफ के अनुभव से सीखा है , तो वो इंसान उड़ेगा नहीं वो इंसान कुदने नहीं लगेगा मन ही मन मुस्कुरा कर वो यही सोच रहा होता है कि मुझे तो ये भी पता है कि तेरा रिटर्न टिकट कब का है।

आपके एक्सपीरियंस हमेशा आपको ये सीखाते हैं कि क्या करने से लोग आपके पीछे आएंगे? क्या करने से लोग आपके लिए रोएंगे या आपके लिए तड़पेंगे और क्या करने से वो आपसे दूर जाएंगे और क्या करने से वो आपको इग्नोर करेंगे। बस हमारी गलती ये है कि हम चीजों को ऑब्जर्व नहीं करते। 

हमारा सबसे बड़ा गुरु होता है हमारे एक्सपीरियंस, हमारे अनुभव हर दिन आपके साथ कोई ना कोई एक्सपीरियंस होता है। कुछ अच्छा होता है, कुछ बुरा होता है। अब मायने ये नहीं रखता है कि आपके साथ अच्छा एक्सपीरियंस हुआ या बुरा एक्सपीरियंस हुआ मायने ये रखता है कि हर दिन आप अपनी लाइफ के एक्सपीरियंस से क्या सीख रहे हो। आप समाज में देखोगे तो आज जो लोग अपने पार्टनर को वादा कर रहे हैं उनके लिए मरने का और मिटाने का वो लोग भी एक दिन अपने पार्टनर को छोड़कर जाएंगे ही।

फिर भी लोग उनके ऊपर विश्वास क्यों कर रहे हैं? बस इसीलिए क्योंकि उन्होंने अपनी लाइफ के एक्सपीरियंस से कभी भी कुछ सीखा नहीं। उनको ह्यूमन साइकोलॉजी का बिल्कुल भी कोई आईडिया नहीं है। अब कुछ टाइम पहले एक लड़की ने मेरे साथ बात की थी और मुझे बता रही थी कि मेरे बॉयफ्रेंड ने एक साल पहले मेरे साथ ब्रेकअप कर लिया था और मैं कंटीन्यूअस उसको मनाने की कोशिश कर रही थी। उसने ब्रेकअप किया, तब से लेकर एक साल तक मैंने इतनी मेहनत की फिर भी मेरा बॉयफ्रेंड नहीं मान रहा है। वो वापस आना ही नहीं चाहता था तो उस लड़की ने बताया कि बहुत मेहनत करने के बाद फिर मैं हार गई मेरी उम्मीद खत्म होने लगी, तो फिर मैं उन चीजों को छोड़ दिया। उसके बारे में सोचना बंद कर दिया।

अब मैं अपने में मस्त रहती, अपने लाइफ में फोकस करती, अपना काम, अपने जो शौक है उन्हीं चीजों में बिजी रहती है। लेकिन मैंने जैसे ही उसके बारे में सोचना बंद किया और दो-तीन महीने हो गए होंगे धीरे-धीरे जो मेरा X बॉयफ्रेंड था। वो मेरे दोस्तों को कांटेक्ट करने लगा और मेरे बारे में पूछने लगा और जैसे उसको मेरे दोस्तों से ये पता चलने लगा कि भाई अब मैं ना अपनी life में नॉर्मल हूँ। मैं उसके लिए रोती नहीं हूं। मैं अपनी लाइफ में move on कर गई हूँ। उसके बाद यह जानने के बाद ही मेरा x बॉयफ्रेंड मेरे को ज्यादा ऑब्जर्व करने लगा। सोशल मीडिया पर और हर जगह पर, लोगों को पूछने लगा और जैसे-जैसे उसको यह पता चलने लगा ना की भाई मैं रियल में move on हो गई हूं।

तब से वो इंसान मेरे में इंटरेस्ट ज्यादा दिखाने लगा है। वो मेरे साथ बात करने लगा है। मुझे सॉरी बोलने लगा है और वो सामने से ये बोल रहा है कि वह वापस आना चाहता है। वह लड़की मुझसे ये समझना चाहती है कि ये पॉसिबल कैसे हुआ? और उसको इस सिचुएशन में क्या डिसीजन लेना चाहिए । क्योंकि किसी इंसान के लिए आप एक साल मेहनत करते हो फिर भी वह वापस नहीं आता। और आप किसी इंसान के बारे में सोचना छोड़ देते हो और 3 महीने में वो इंसान सामने से आता है। दोस्तों life की यही मिस्ट्री है जो ज्यादातर लोग नहीं समझ पाते हैं कि जब कुछ चीजें हम पाने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत करते हैं। हद से ज्यादा मेहनत कर लेते हैं फिर भी वो चीज हमें नहीं मिलती। लेकिन कई बार वही चीज हमें ऐसे ही मिल जाती है। जब शायद हम उसके बारे में सोचना भी छोड़ चुके होते हैं।

पता ऐसा क्यों होता है? कि तब असल में हम उस चीज को पाने के लायक बन जाते हैं। 

2. अपने आप को लायक बनाएं: किसी के प्यार, पैसे, या सम्मान के पीछे भागने के बजाय, अपने आप को उस चीज के लायक बनाएं। जब आप अपने आप को मजबूत और स्वतंत्र बना लेंगे, तो लोग खुद-ब-खुद आपकी ओर आकर्षित होंगे।

इस पोस्ट का पूरा थीम ये है कि आपको किसी का प्यार पाने के लिए कुछ भी करने की जरूरत नहीं है। सिर्फ अपने आप को लाइक बनाने की जरूरत है और यह बात मैं आपको एक छोटी सी कहानी सुना कर समझाना चाहूंगा।

एक गांव में एक बहुत ही धनी इंसान रहता था। वैसे वो शरीर से भी बहुत ज्यादा मजबूत था वैसे तो वह इंसान काफी ज्यादा धार्मिक था लेकिन साथ-साथ जिद्दी और गुस्से वाला इंसान था। उस इंसान ने अपने पूरे जीवन में बहुत ज्यादा धन कमाया है। लेकिन इतना ज्यादा धन कमाने के बाद भी उसके जीवन में कोई सुकून नहीं था। उसके दिमाग में कोई शांति नहीं थी। तो उसने सोचा क्यों ना भगवान को पाया जाए।
 
शायद भगवान को पाने के बाद उसके मन को शांति मिलेगी तो उसके पास जो कुछ भी था। बहुत ज्यादा धन था या अपना घर था अपना परिवार था उसने सब कुछ लोगों में बांट दिया। सब कुछ छोड़ दिया और वह जंगल की तरफ चल पड़ा। तप करके भगवान को पाने के लिए तो उस इंसान को ऐसा लगता था कि मैं तो बहुत ही आसानी से बहुत इजीली भगवान को पा लूंगा। भगवान को मुझे दर्शन देना ही पड़ेगा क्योंकि मैंने भगवान को पाने के लिए इतना सारा धन जो मैं बहुत मुश्किल से कमाया था। उसको मैं छोड़ रहा हूं। मैं अपने घर को, अपने परिवार को, सारी चीजों को मैं छोड़ रहा हूं और मैं कड़ा तप भी करूंगा तो भगवान तो मुझे ऐसे आसानी से दर्शन दे ही देंगे। 

तप करने लगा लेकिन जब टाइम बितता गया। सालों के साल बीतने लगे। तब इंसान धीरे-धीरे सोचने लगा कि इतना ज्यादा टाइम हो गया है और मैं बहुत टाइम से भगवान का ध्यान लगाकर बैठा हूं। तप कर रहा हूँ फिर भी भगवान मुझे दर्शन क्यों नहीं दे रहे। अब उस इंसान को धीरे-धीरे अफसोस होने लगा। भगवान को पाने के चक्कर में मैंने जो बहुत मुश्किल से धन कमाया था। अपना पूरा परिवार अपना सारा, सब कुछ छोड़ दिया। और ये सब कुछ छोड़ने के बाद भी मुझे भगवान तो नहीं मिले। अब धीरे-धीरे उसको गुस्सा भी आ रहा था और उसे अफसोस भी हो रहा था।

दोस्तों इस कहानी के बीच में, मैं आपको एक छोटी सी मजेदार बात बताना चाहता हूं। इस टाइम पर जिस तरह से उस तपस्वी की हालत है। ज्यादातर प्रेमियों की हालत भी प्रेम में एक टाइम पर ऐसी होती है। जब वो अपने पार्टनर के लिए जब अपने प्रेमी के लिए धीरे-धीरे वो अपने दोस्तों को छोड़ देता है। फैमिली को छोड़ देता है अपने काम को इग्नोर कर लेता है और अपने प्यार के लिए अपने पार्टनर के लिए सारी चीजों को सैक्रिफाइस करने लगता है और उसके बाद होता ये है कि अंत में कई बार उसको उसका प्यार भी नहीं मिलता। और जो चीजें उसने गवाई वो भी उसकी लाइफ में वापस नहीं आती तब इसी तपस्वी की तरह अफसोस करता है। 

बहुत ज्यादा निराश हो गया था और वह अफसोस कर रहा था कि इतना कुछ पाने के बाद भी भगवान तो मुझे नहीं मिला और अंदर से मन ही मन उसने एक्सेप्ट कर लिया था कि शायद मेरे में वो लायक ही नहीं है मेरे में वो बात ही नहीं है जिसके कारण भगवान मुझे दर्शन दे।

अब उसने अपने दिमाग से भगवान को पाने का जो ख्वाब था या ख्याल था वो भी निकाल दिया। अब भगवान उनके लिए ऐसे बन गए थे अगर भगवान को मिलते भी है या नहीं मिलते तो उसको फर्क नहीं पड़ता।
उसको भगवान अब चाहिए ही नहीं थे। उसको भगवान इसलिए नहीं चाहिए थे क्योंकि उसको भगवान से कोई प्रेम नहीं था उसका तो ईगो था कि मैं अपनी लाइफ में धन को पा लिया। मेरे पास बहुत मजबूत शरीर है। मेरे पास यह है वह है मैं भगवान को भी जीत सकता हूं। तो वह अपने इस इगो को बड़ा बनाना चाहता है और यहां पर वह हार गया। उसका ईगो टूट कर चकनाचूर हो गया।

इसलिए अब उनकी नजरों में भगवान को पाना कोई इंपॉर्टेंट चीज नहीं रही थी। ऊपर से उस इंसान ने सरेंडर भी किया था कि शायद मुझ में  लायक भी नहीं है कि भगवान मुझे दर्शन भी दे। तो यह सब कुछ सोच कर जैसे ही वह खड़ा होता है। अपनी घर की ओर वापस चलने के लिए और जैसे वह दो कदम चलता है तो सामने से देखा है कि भगवान खुद चलकर उसके पास आ रहे हैं। तो ये सब कुछ देखकर वह शॉक्ड हो जाता है और वह भगवान से बोलने लगता है कि आपकी कैसे लीला है।

मैंने आपको पाने के लिए सालों तक यहीं पर बैठकर कितनी घोर तपस्या की थी। मेरा पूरा शरीर बर्बाद हो गया तप करते-करते। ढंग से अपने शरीर का ख्याल भी नहीं रखा। आपको पाने के लिए मैंने अपना धन छोड़ दिया। मैंने अपना घर, परिवार सब कुछ छोड़ दिया। और इतना सब कुछ करने के बाद भी आपने मुझे दर्शन नहीं दिया लेकिन अब मेरे मन में यह ख्याल भी नहीं है कि मुझे आपको पाना है या आपके दर्शन करने हैं और जब मैं इन चीजों से आगे बढ़ रहा था। तब आप सामने से मेरे पास आ रहे हैं तब भगवान ने उसको जवाब दिया कि ऐसा नहीं कि मेरे भक्त ही मुझे पाना चाहते हैं मैं भी अपने भक्त से मिलना चाहता हूं। मैं भी उसको पाना चाहता हूं लेकिन जब तक हम दोनों मिल सके ऐसा रास्ता नहीं बनता। तब तक मैं उसके पास पहुंच ही नहीं सकता। मतलब जब तक तुम लायक नहीं बनोगे। तब तक मैं तुम्हें दर्शन नहीं दे पाऊंगा। 

तुम्हें मुझे पाने के लिए इतना कड़ा तप करने की जरूरत नहीं थी। ना तो तुम्हें धन का त्याग करने की जरूरत थी। ना ही परिवार का त्याग करने की जरूरत थी। तुम्हें सिर्फ और सिर्फ जरुरत थी अपने अहंकार का त्याग करने की जरूरत थी। जिसका अहंकार छूट जाता है। मैं उसको ऐसे ही मिल जाता हूं।

3. अहंकार का त्याग: हमारे अहंकार को छोड़ना सबसे महत्वपूर्ण है। जैसे एक धनी व्यक्ति जिसने सब कुछ छोड़कर भगवान की तलाश की, लेकिन भगवान तब तक नहीं मिले जब तक उसने अपने अहंकार को नहीं छोड़ा।

अगर आप किसी इंसान को ये दिखा दे कि मेरा इंटरेस्ट तुझ में नहीं है सिर्फ यह दिखाने से सामने वाले का इंटरेस्ट आप में बढ़ने लगता है। यानी कि सिर्फ इग्नोर करके सामने वाले का इंटरेस्ट बन सकता है। 

यानी कि आप सिर्फ ये नाटक कर रहे हो सामने वाले इंसान की ओर की आपको उसकी जरुरत नहीं है। आपको उनकी जरुरत नहीं है सिर्फ इस बात का नाटक करने से उनका इंटरेस्ट आप में बढ़ रहा है तो अब सिर्फ सोचए कि जब आप इमोशनली स्ट्रांग हो जाओगे कि रियल में आपको खुश रहने के लिए किसी भी इंसान की जरुरत नहीं रहती।

तब उस इंसान का आकर्षण या किसी भी इंसान का आकर्षण आप में कितना बढ़ सकता है। जब किसी के होने ना होने से आपको फर्क पड़ना बंद हो जाएगा तो सोचए कितनी जल्दी आप लोगों को अपनी और अट्रैक्ट कर पाएंगे। 

जब आपकी जीवन में ऐसी स्थिति आती है। जहां पर आपको किसी की भी  जरुरत नहीं होती, आपको कोई नहीं चाहिए होता। तब असल में आप लायक बन जाते हो। हर किसी इंसान को पाने के लिए, फिर आप कुछ भी नहीं करोगे ना तो फिर भी लोग आपकी लाइफ में आएंगे। 

हम सब यह जानते कि बिना धन के किसी को मान सम्मान नहीं मिलता और पहले के जमाने में जो साधु संत थे वो एकदम निर्धन होते थे और भिखारी भी आज भी निर्धन होते हैं। उस जमाने में लोग निर्धन होने के बाद भी साधु संतों की बहुत ज्यादा रिस्पेक्ट करते थे। उनकी सेवा करते थे। उस जमाने के राजा महाराजा खुद उनको मिलने के लिए उनके आश्रम जाते थे। लेकिन उस जमाने में भी लोग भिखारी की कोई रिस्पेक्ट नहीं करते थे। वैसे देखा जाए तो दोनों ही निर्धन ही तो है फर्क इतना है कि एक के पास धन की कमी है वो पाना चाहते हैं लेकिन उसके पास है नहीं। लेकिन दूसरा ऐसा जिसको धन की कोई जरूरत ही नहीं है इसलिए वो धन को पाना ही नहीं चाहता। इसलिए उसके सामने राजा महाराजा भी झुक जाते थे। अगर आप चाहते हो कि आपका पार्टनर कभी भी आपको इग्नोर ना करें। आपको छोड़कर ना जाए तो आपकी लाइफ का टारगेट किसी का प्यार पाना नहीं होना चाहिए। अपने आप को ऐसा बनाना होना चाहिए। जहां पर आपको किसी की जरुरत ही ना रहे खुश होने के लिए। 

किसी इंसान का प्यार पाकर उसमें खुशी ढूंढने की कोशिश करोगे तो आपको शॉर्ट टर्म के लिए खुशी मिलेगी। लेकिन आप अपने आप को ऐसा बना लोगे कि जहां पर आपको खुश रहने के लिए किसी की जरुरत ही ना हो तो वो खुशी आपके साथ हमेशा रहेगी। दूसरे इंसान का मतलब ही होता है कि आप इतने अधूरे हो कि अपने आप को खुश रखने के लिए किसी दूसरे का सहारा चाहिए।

4. आत्मनिर्भरता: बच्चों की तरह बनें, जो अपनी खुशी के लिए किसी पर निर्भर नहीं होते, हमें भी अपनी खुशी के लिए आत्मनिर्भर होना चाहिए। जब हम अपनी खुशी के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहेंगे, तभी हम वास्तव में स्वतंत्र और आकर्षक बन पाएंगे। और आकर्षक को हर कोई प्रेम करेगा।

मैं हफ्ते में 15 लोगों से बात करता हूं उसमें कम से कम सात से आठ लोग ऐसे होते हैं जो सेम टू सेम मुझे एक ही बात बताते हैं कि पहले मेरा पार्टनर मुझे बहुत ज्यादा प्यार कर रहा था।

अब बुरी तरह से वही इंसान मुझे इग्नोर कर रहा है। आपको पता है ज्यादातर लोगों के साथ ऐसी चीजें क्यों हो रही है। क्योंकि रिलेशनशिप में धीरे - धीरे खुश रहने के लिए भी अपने पार्टनर के ऊपर पूरी तरह से डिपेंड हो जाता है।

अब उनका अपने पार्टनर के बिना कुछ भी नहीं चल सकता। उसका पार्टनर उसको चाहिए ही चाहिए। रिलेशनशिप में जो इंसान अपने पार्टनर के ऊपर डिपेंड नहीं होता। उसके पार्टनर का उसमें इंटरेस्ट कम हो जाए यह पॉसिबल ही नहीं है। 

5. दूसरों के सहारे मत रहो: बुद्ध ने कहा था, "अपने दीपक खुद बनो।" किसी और से खुशियाँ पाने की अपेक्षा करना अंततः निराशा का कारण बनता है।

दूसरे इंसान का मतलब ही होता है कि आप किसी और के ऊपर डिपेंड हो। आप पूर्ण हो ही नहीं। किसी इंसान के आपकी लाइफ में आने से शॉर्ट टाइम के लिए बहुत ज्यादा खुशी आ सकती है। लेकिन बहुत ही शॉर्ट टाइम में वो इंसान भी जा सकता है। उसके पीछे-पीछे उसकी खुशियां भी जाएगी और वो इंसान और वो खुशी ही आपके जीवन का सबसे बड़ा दुख का कारण भी बनता जाएगा। 

लेकिन जब आप अपने आप को इतना मजबूत बना लेते हो कि आपको खुश रहने के लिए किसी की जरूरत नहीं पड़ती। तब आप हमेशा के लिए अपनी लाइफ में खुश तो हो जाते हो लेकिन लोग भी आपके ओर अट्रैक्ट होंगे। लोग सामने से आपको प्यार भी करेंगे।

क्यों क्योंकि आप दिखा रहे हो कि आप डिपेंड नहीं हो। आप दिखा रहे हो कि आपकी कोई नीड ही नहीं है, आपको जरूरत ही नहीं है लोगों के प्यार की। 

6. अपने काम में डूब जाओ: अपने काम और करियर से प्यार करो। जब आप अपनी इमोशनल नीड्स से आजाद हो जाएंगे, तो लोग खुद-ब-खुद आपकी ओर आकर्षित होंगे।

इस दृष्टिकोण को अपनाकर, आप पाएंगे कि वह सब कुछ जो आप चाहते हैं, बिना किसी विशेष प्रयास के आपको मिलने लगेगा। अपने आप को लायक बनाएं और देखें कि दुनिया कैसे आपके कदमों में झुकती है।

Conclusion:

अपने आप पर काम करें, अपने अनुभवों से सीखें और अपने अंदर की शक्ति को पहचानें। आप जो चाहते हैं उसे पाने के लिए पीछे मत भागो, बल्कि अपने आप को उसके योग्य बनाओ। यही सफलता और खुशी का असली रहस्य है।

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